लोमड़ी को कुत्ता समझकर पाला
जानवर पालने वाले लोगों को आमतौर पर अपने पालतू जानवर के बारे में सब कुछ पता होता है। वे उसके खाने-पीने पसंद नापसंद के बारे में भी जानते होते है। पर इस मामले पर एक फैमिली इतनी नादान निकली कि उसने एक लोमड़ी को कुत्ता समझकर लगभग 3 महीने तक पाला और जब उन्हें पता चला जिसे वह कुत्ता समझ के पाल रहे थे वह एक कुत्ता ना होकर एक लोमड़ी है तो उनके होश उड़ गए।
लगभग 3 महीनों के बाद
जी हां, पेरू के कोमास शहर मे रहने वाली मरिबेल सोटेलो ने एक स्थानीय दुकानदार से 966 रूपये मे एक पिल्ला खरीदा। दुकानदार ने इसे साइबेरियन हस्की नस्ल का कुत्ता बताया था। वह पिल्ले को घर ले आऐ और उसका नाम "रन रन" रखा। परिवार कुत्ता पालकर बहुत खुश था। कुत्ता भी उनके साथ घुलमिल गया था। फिर लगभग 3 महीनों के बाद "रन रन" ने पड़ोस के घरों मे मुर्गी और बत्तखो को पकड कर मारना शुरु कर दिया।
जब पडोस के लोग शिकायत करने लगे तो वन विभाग के कर्मचारी कुत्ते को पकडने के लिये आ गये। जब उन्होने कुत्ता पकडा तो वह भी हैरान रह गये। कयोकि वह कुत्ता नही बल्कि एक लोमडी थी। परिवार तीन महिने से एक लोमडी को कुत्ता समझ कर पाल रहा था। परिवार ने कहा कि "रन रन" जब रोज रोज पडोस की पालतू मुर्गी और बत्तखे पकडने लगा और उन्हे मारने लगा तो थोडा शक हुआ था।
बेचते वक्त हमसे सच्चाई छिपाई
वन विभाग के कर्मचारी ने बताया की वह एक एडियन लोमडी है, जिसके पैर पतले और सिर नुकिला होता हे। इसकी पूंछ की बनावट भी अलग है। परिवार का कहना है कि दुकानदार ने "रन रन " को बेचते वक्त हमसे सच्चाई छिपाई। जिसके कारण हमे सच पता नही चला। जब हम "रन रन" को घर लाये थे तब उसके शरीर पर घाव भी थे। हम पूरे परिवार ने मिलकर "रन रन" का पूरा ख्याल रखा।
वन विभाग ने चिडीया घर भेजा
शुरू मे तो वह कुत्तो कि तरह ही था। यहां तक कि वह कुत्तो कि तरह भोंकता भी था। कुत्तो का खाना भी खाता था। मगर कुछ हि दिनो बाद उसमे लोमडी वाले लक्षण दिखाई देने लगे। वह ठिक हुआ तो उसने आस पास के पालतू जानवरो को मारना शुरु कर दिया। इसकी वजह से पडोसियो के साथ हमारे झगडे होने लगे थे। बहरहाल वन विभाग ने इस एडियन लोमडी को एक चिडीया घर भेज दिया है।
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